कभी आस्ट्रेलिया तक जाता था रावण, अब छोटा हुआ रावण का कद

आपका प्रदेश उत्तर प्रदेश दिल्ली सफल वार्ता

इस बार पुतलों के बाजार में ‘रावण’ का कद और छोटा हो गया है. अर्थव्यवस्था में सुस्ती की मार से ‘रावण’ भी बच नहीं पाया है. पुतला बनाने वाले कारीगरों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है. इन कारीगरों का कहना है, ‘‘अर्थव्यवस्था सुस्त है, साथ ही पुतला बनाने वाली सामग्रियों के दाम काफी चढ़ चुके हैं. ऐसे में हमें पुतलों का आकार काफी छोटा करना पड़ा है.”
राजधानी के पश्चिम दिल्ली का तातारपुर गांव पुतलों का प्रमुख बाजार है, दशहरा से करीब 45 दिन पहले आसपास के राज्यों के कारीगर पुतला बनाने वाले बड़े ‘दुकानदारों’ के पास आ जाते हैं. पुतला बनाने वालों में दिल्ली के अलावा हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक तक के कारीगर शामिल हैं.


25 साल से पुतला बना रहे महेंद्र कहते हैं, ‘‘अर्थव्यवस्था में सुस्ती है. अन्य क्षेत्रों की तरह इसका असर पुतलों के कारोबार पर भी पड़ा है. इस वजह से हमें पुतलों का आकार कम करना पड़ा है क्योंकि पुतला जितना बड़ा होगा, लागत भी उतनी ही अधिक होगी और दाम भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा.” महेंद्र ने कहा, ‘‘पुतला बनाने की सामग्री भी काफी महंगी हो चुकी है. 20 बांस की कौड़ी का दाम 1,200-1,300 रुपये हो गया है जो पिछले साल तक 1,000 रुपये था. पुतला बांधने में काम आने वाली तार भी 50 रुपये किलो के बजाय 150 रुपये में मिल रही है. कागज का दाम तो लगभग दोगुना हो गया है.” पुतला बनाने के कारोबार से जुड़े सुभाष ने कहा, ‘‘कभी तातारपुर का रावण विदेश भी भेजा जाता था। यहां से रावण के पुतले विशेष रूप से आस्ट्रेलिया तक भेजे जाते थे, लेकिन अब विदेशों से मांग नहीं आती है.”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *