भारत में क्यों सस्ता हुआ नहीं, पाकिस्तान में 15 रुपए सस्ता हुआ पेट्रोल ?

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक़े इंसाफ़’ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया है कि ‘अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें कम हो रही हैं, इसलिए पाकिस्तान सरकार ने मई महीने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमत कम कर दी है ताकि आम लोगों को इससे कुछ लाभ मिल सके.’

देश की ऑयल एंड गैस रेग्युलेटरी अथॉरिटी (OGRA) ने पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय से यह अनुरोध किया था कि ‘अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें कम हो रही हैं, इसलिए देश में भी तेल की क़ीमतें कम की जाएं.’

पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक़ एक मई 2020 से देश में नई क़ीमतें लागू हो चुकी हैं जिसमें पेट्रोल पर 15 रुपए, हाई स्पीड डीजल पर 27.15 रुपए, मिट्टी के तेल पर 30 रुपए और लाइट डीजल ऑयल पर 15 रुपए कम किए गए हैं.

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के कुछ लोग सरकार के इस फ़ैसले की तारीफ़ कर रहे हैं. वो लिख रहे हैं कि ‘कोविड-19 महामारी की वजह से जो अतिरिक्त आर्थिक दबाव उन पर बना है, तेल की क़ीमतें कम होने से उसमें थोड़ी राहत मिलेगी.’

लेकिन आर्थिक मामलों के कुछ जानकार सरकार के इस फ़ैसले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बता रहे हैं.

पाकिस्तान के नामी अर्थशास्त्री, डॉक्टर कैसर बंगाली ने लिखा है कि ‘हर बार तेल की क़ीमत कम होने के साथ महंगाई या सार्वजनिक परिवहन की क़ीमतों में कोई कमी नहीं आती. उपभोक्ताओं का मुनाफ़ा एक झूठा प्रचार है जो तेल बेचने वाली कंपनियाँ अपनी सेल बढ़ाने के लिए करती हैं.’

2004 वाले रेट होने चाहिए भारत में

कांग्रेस पार्टी ने मार्च के महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दलील के साथ घेरने की कोशिश की थी कि ‘अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें क़रीब 35 प्रतिशत घट चुकी हैं तो भारत की आम जनता को तेल की घटी हुई क़ीमतों का मुनाफ़ा कब मिलने वाला है? भारत सरकार कब पेट्रोल की क़ीमत 60 रुपये प्रति लीटर से नीचे लाएगी?’

पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा था कि ‘कच्चे तेल की जो क़ीमत नवंबर 2004 में थी, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में वही क़ीमत अब है. तो मोदी सरकार भारत में तेल की क़ीमतों को 2004 वाले रेट पर क्यों नहीं ला रही.’

21 अप्रैल को एक बार फिर कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि “दुनिया में कच्चे तेल की क़ीमतें अप्रत्याशित आँकड़ों पर आ गिरी हैं, फिर भी हमारे देश में पेट्रोल 69 रुपये और डीज़ल 62 रुपये प्रति लीटर क्यों? इस विपदा में जो दाम घटें, वो उतना अच्छा. कब सुनेगी ये सरकार?”

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