जूनियर डॉक्टरों की पिटाई से स्वास्थ्य सेवाएं ठप

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पश्चिम बंगाल में तीन दिनों से स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप रहने के बाद गुरुवार को आंदोलनकारी डॉक्टर और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीन दिनों की चुप्पी के बाद गुरुवार दोपहर को कोलकाता स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया और आंदोलनकारी डॉक्टरों को तुरंत हड़ताल ख़त्म करने का अल्टीमेटम दिया. ममता के दौरे और दबाव की वजह से मेडिकल कॉलेज अस्पताल का आपातकालीन विभाग तो खुल गया. लेकिन आंदोलनकारी डॉक्टर टस से मस होने को तैयार नहीं हैं. ममता के ख़िलाफ़ भी अस्पताल में नारे लगे.उन्होंने दोपहर दो बजे तक आंदोलन ख़त्म करने को कहा था.वही दूसरी ओर, आंदोलनकारी डॉक्टर अब सरकार पर दबाव बनाने के लिए सामूहिक इस्तीफ़े की योजना बना रहे हैं. सागर दत्त मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आठ डॉक्टरों ने आज इस्तीफ़ा दे दिया. इस बीच, आंदोलनकारी डॉक्टरों की एक प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी से मुलाक़ात कर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की है.

ममता ने कहा, “राज्य के बाहरी लोग ही गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं. इसलिए मरीज़ों और उनके नज़दीकी परिसरों के अलावा किसी को अस्पताल परिसर में नहीं रहने दिया जाएगा.”
मुख्यमंत्री ने पहले हड़ताली डॉक्टरों के काम पर लौटने के लिए चार घंटे की समयसीमा तय की थी. लेकिन फिर उसे संशोधित कर दोपहर दो बजे की समयसीमा तय की. लेकिन हड़ताली डॉक्टरों ने ममता के अल्टीमेटम को ख़ारिज करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है.

ममता का बीजेपी पर आरोप

ममता ने कहा कि वह इस आंदोलन की निंदा करती हैं. जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल भाजपा और माकपा की साज़िश है. उन्होंने बीजेपी पर इस हड़ताल को सांप्रदायिक रंग देने का भी आरोप लगाया. मुख्यमंत्री का कहना था, “बीजेपी माकपा की सहायता से हिंदू-मुस्लिम राजनीति कर रही है.”

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